मध्यान आरती

दोपहर 12ः00 बजे
पंचारती आरती
श्री सचिदानन्द सदगुरु साईनाथ महाराज की जय।
लेकर पंचारती करे बाबा की आरती।  करे साई की आरती करें बाबा की आरती ।।
उठो उठो हे बांधव। करे साई की आरती। करें बाबा की आरती करे साई की आरती ।।
कर के स्थिर मन देखो बाबा का ये सुन्दर ध्यान। साई का सुन्दर ध्यान। बाबा का ये सुन्दर ध्यान।
कष्ष्ण नाथा दत्त साई चरणों में है आस लगाई। चरणों में आस लगाई। साई चरणों में आस लगाई।।

आरती
आरती साई बाबा। सुखकारक तू है देवा। चरणों की धूली में।

दे दो भक्तों को सहारा । दास को सहारा ।। आरती साई बाबा.......
जग जाये आनन्द, सतस्वरुपी में हो मगन, मुमुक्ष को दे दो। दर्शन, हे श्रीरंग देवा श्रीरंग।। आरती साई बाबा......
मन को जैसा भावे वैसा अनुभव पावे, कर दया दास पर। दया खूब दिखावे । खूब दिखावे।। आरती साई बाबा.......
नाम जपने से तेरे मिट जाता है पाप, अपार तेरी करनी। राह दिखाता नाथ - दिखाता है नाथ। आरती साई बाबा.
कलयुगी में अवतार,सगुणपरब्रम्ह साकार अवर्तीण होवे है। स्वामी दत्तादिगम्बर -दत्तादिगम्बर, आरती साई बाबा....
हर दिन हर गुरुवार भक्त आते हैं, तेरे द्वार प्रभूपद को निहार। भक्त होते भव पार होते भव पार ।। आरती साई बाबा.....
तेरे चरणों की सेवा यही मेरा है मेवा यही चाहॅू मैं देवा। तुम हो देवां के देवा, देवों के देवा।। आरती साई बाबा......
में तो दिन चाकर चाहूॅं चरण अम्त। यही पिला देना। अपना वचन निभाना वचन निभाना।। आरती साई बाबा....
सुखकारक तू है देवा। चरणों की धूली में। दे दो भक्तो को सहारा दास को सहारा।। आरती साई बाबा...

जयदेव आरती
जयदेव जयदेव दत्ता अवधूता। ओ साई अवधूता।

हाथ जोड़े मैने टेकाया माथा। जय देव जय देव।। .........
जव हो प्राणी जव अवतार तू लेता। नास्तिक को भी नित्य भजनी वनाता।
अनन्त रुपों में वो रचाये लीला। दीन दुखियों के तू संकट है हरता।। जयदेव........
यवनस्वरुप में किसी को दर्शन है देता। द्वैत अद्वैत का संसय हर लेता।
गोपी चंदा मंदा को तू उद्धारे। मुस्लिम वेश धारे तू जन को तारे।। जयदेव...
हिन्दू मुस्लिम में भेद नहीं कोई यही बतलाने आया है साई।
हिन्दू मुस्लिम सब को प्यार तू है देता। परमात्मा का रुप सवको दिखाता।। जयदेव.....
साई चरणों में अगंण्त हो जाये। माया मोहित जन मुक्ति पा जाये।
तेरी कृपा से संकट टल जायें दे दो वरदान कृष्णा यही गाये।। जयदेव....

अभग
शिरडी मेरा पंढरपुर । साई बाबा रमावर बाबा रमावर ।।1।।साई
शुद्व भक्ति चन्द्रभागा। भाव पुंडलीक जागा पुंडलीक जागा।।2।। भाव
आहो आहो सकल जन। करो बाबा को वंदन साई को वंदन।।3।। करो
करु कहे बाबा साई। करो कृपा मेरे साई। करो कृपा मेरे साई।।4।। करो नमन

नत हो कर मैं चरण निहारु। देखू नयन से रुप तेरा।
प्रेमानन्द से करु मैं पूजन। भक्ति भाव से कहे नमामी।।1।
त्वमेव माता च पिता त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विघा द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम, देव्रदेव।।2।।
कायेन वाचा मनसेद्रिययैंवा, बुद्धयात्माना वा प्रकृति स्वभावत।
करोमि यद्यत्सकलं परस्मै, नारायणायेति सर्मपयामि।।3।।
अच्यूतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदंर वासुदेवं हरिम्।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायंक रामचन्दं्र भजे।। 4।।

नामस्मरण
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।।

श्री गुरुदेव दत्ता..
पुष्पांजली
हरि ऊॅं यज्ञेन यज्ञमयजंत देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन।
ते ह नाकं महिमानं संचत यत्र पुर्वे साध्या संति देवा।।
ऊॅ राजाधिराजाय प्रसह्मसाहिने नमों वयं वेश्रवणाय कुर्महे।
स में कामान्कामकामाय मह्मं कामेश्वरो वैश्रवणो दघातु।।
कुबेराय वैश्रवणाय महाराजाय नमः। ऊॅ स्वस्ति। साम्राजं
भौज्यं स्वाराज्यं वैराज्यं पारमेहमं राज्यं माहाराज्यमाधिपत्य मयं
समंतपर्यायी इस्यात्सार्वभौमः सार्वायुष्य आंतादापरार्घात् पृथिव्यैः
समुद्रपर्यताया एंकराळति। तदप्यैष श्लौकोश्भि गीतो मरुतः परिवेष्टारो मरुत्तस्यावसंन्गृहे आविक्षितसय कामप्रेर्विश्वेदेवाः सभासद इतिः।।
श्री नारायण वाशुदेवाय सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय।।

नमस्काराष्टक
कैसे करु तेरी स्तुती अंनन्ता, कैसे नमन करु तुझे अंनन्ता ।
शेष है थकता तेरे गुण गाता, वंदन करु मैं तुझे साई नाथा ।।
मन ये चरणों में तेरे बसा है। हृदय में तेरी भक्ती जगी है।
जग के उद्धार को तुम्हीं हो दाता वंन्दन करु मैं तुझे साई नाथा ।।
शिरडी में रहता लीला दिखाता पर वो लोगों को अज्ञानी लगता।
फिर भी तुम्ही हो ज्ञान के दाता, वंन्दन करु मैं तुझे साई नाथा ।।
मिला जन्म मानव का भाग्य हमारा, मांक्ष का साधन है द्वार तुम्हारा।
साई प्रेम से अहम है जलता, वंन्दन करु मैं तुझे साई नाथा ।।
अज्ञानी बालक हमें दो साहारा, करो धन्य हमको दे दो किनारा।
बस एक तुम्ह हो मेरे जन्मदाता, वंन्दन करु मैं तुझे साई नाथा ।।
सुरादीक जिनके वंदन है करते, शुकादीक जिनके शीश हैं झुकते।
प्रयागादि तीर्थ चरणों में पाता, वंन्दन करु मैं तुझे साई नाथा।।
निरथती पद के तेरे व्रज गांपिकाऐं, प्रेम से मन में वो हरी को बसाये।
करें रास क्रीड़ा संग कृष्णनाथा, वंन्दन करु मैं तुझे साई नाथा ।।
जो विनती कंरे हम पूरी करो तुम, बुरे हैं कर्म मेरे मन बसो तुम।
मोहनीराज को भव से तारों हे नाथा, वंन्दन करु मैं तुझे साई नाथा ।।

प्रार्थना
ऐसे हो देवा । साई दिगम्बरा। अक्षय रुप अवतारा।
विश्व व्यापक तू। श्रुतिसारा।अनुसियाधिमारा। ऐसे हो बाबा।।
काशी स्नान जपो। प्रतिदिन में। भिक्षा कोल्हापुर में ।
निर्मल नदी तुगां। जलप्राशी, निंद्रा बाहुर देश में, ऐसे हो बाबा।।
झोली लटक रही कंधे पर। त्रिशूल डमरु धारी।
भक्तों को वर देता,सुख कारी,देता मुक्ती चारी,ऐसे हो बाबा।।
चरणों में पादुका। जपमाला। कमण्डल मृगछाला।
धारण करते है,नागजटा मुकुट शोभितो माथा।ऐसे हो बाबा।।
जो तेरे रुप का है ध्यानी। सदैव उसके घर में
लक्ष्मी वास करे दिनरात। संकट दूर है करते। ऐसे हो बाबा।।
मन में तू ही रहे। गुरु नाथा। नयन में बस तू छाया।
पुर्णानन्द सुखे, रजकाया हरि का गुण है गांता, ऐसे हो देवा।।
साई दिगम्बरा। अक्षय रुप अवतारा।
विश्व व्यापक तू। श्रुतिसारा, अनुसियाधिमारा। ऐसा हो देवा।।

श्री साईनाथमहिन्मस्त्रोम
सदा सतस्वरुपमं चिदानंद कंदं, जगत्संभवस्थान संहार हे तुम। स्वभक्तच्छया मानुषं दर्शयतं नमामीश्वरं सदगुरुंसाईनाथम्।।1।।

भवध्वांतविध्वंस मार्तडमीडयं, मनोवाग्गतीतं मुनीर्ध्यानगम्यम्। जगत्व्यापकं निर्मलं निगुणं त्वां नमामी...।।2।।
भवांभोधि मग्नार्दितांनां जनानां स्वपादाश्रितानां स्वभक्तिप्रियाणाम्। समुद्धारणार्थं कलौ संभवंतं नमामी।।3।।
सदा निंबवृक्षस्य मूलाधिवासात्सुधास्त्राविणं तिक्तमप्यप्रिंय तम्। तरु कल्पवृक्षाधिकं साध्यंतं नमामी.. ।।4।।
सदा कल्पवृक्षस्य तस्यधिमूले भवेद्भावबुद्धया सपर्यादिसेवाम् नृणा कुवृता भुक्तिमुक्तिप्रद तं, नमामी..।।5।।
अनेकाश्रुतातर्क्य लीला विलासैः समाविष्कृतेशानभास्वत्प्रभावम । अहंभावहीनं प्रसन्नात्मभावं, नमामी... ।।6।।
सतां विश्रामाराममेवाभिरामं सदा सज्जनैः संस्तुतं सन्नमद्धिः जनामोददः भक्तभद्रप्रदं तं नमामी... ।।7।।
अजन्माघमेकं परं बह्य साक्षात्स्वयं संभवं राममेवावतीर्णम्। भवदर्शनात्संपुनीत प्रभोहं नमामी.. ।।8।।
श्रीसाईश कृपानिधेखिलनृणां सर्वार्थसिद्धिप्रद। युष्मत्पादरजः प्रभावमतुलं धातापिवक्तोक्षतः।।9।।
सद्भक्त्या शरणं कृतांजलिपुटः संप्रापितोस्मि प्रभो, श्रीमत्साई परेशपादकंमलान्नान्यच्छरण्यं ममः।।9।।
साईरुपधर राधवोत्तमं भक्तकामविबुधद्रुमं प्रभुम्। माययोपहतचित्तशुद्धये चिंतयाम्यहमहर्निशंमुदा ।।10।।
शरत्सुधांशुप्रतिमप्रकाशं कृपातपत्र्ां तव साईनाथ। त्वदीयपादाब्जसमाश्रितानां स्वच्छयया तापमपाकरोतु।।11।।
उपासनादैवतसाईनाथ, स्तवैर्मयोपासनिना स्तुतस्त्वम्। रमेन्मनो मे तव पादुयुग्मे, भृडों यथाब्जे मकरंदलुब्धः।।12।।
अनेकजन्मार्जितपापसंक्ष्यो, भवेद्भवत्पादसरोजदर्शनात्। क्षमस्व सर्वानपराधपूंजकांन्प्रसीद साईशे गुरो दयानिधे।।13।।
श्री साईनाथ चरणामृतपूतचित्तास्तत्पाद सेवनरताः सततं च भक्त्या। संसारजन्यदुरितौधविनिर्गतास्ते कैवल्यधाम परमं समवाप्नुवन्ति।।14।।
स्तोत्रमेतत्पठेद्भक्त्या यो नरस्तन्मनाः सदा। सदगुरुः साईनाथस्य कृपापात्रं भवेद् ध्रुवम्।।15।।

प्रार्थना

करचरणकृंत वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवणनसनजं वा मानसं वा पराधम्।
विदितमविदितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व
जय जय करुणाब्धे श्री प्रभो साईनाथं।।1।।
श्री सच्चिदानंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय
ऊॅं राजाधिराज योगीराज परब्रह्य साईनाथ महाराज
श्री सच्चिदांनंद सद्गुरु साईनाथ महाराज की जय